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गो आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

गो आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती पर पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम तिथि – ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी से ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा विक्रम संवत 2083 दिनांक 27 मई 2026 से 31 मई 2026 तक, वार -बुधवार से रविवार तक स्थान- आर सी एम  वर्ल्ड   भीलवाड़ा आजकल खेतों में रासायनिक खाद, कीटनाशक, खरपतवारनाशक, कवकनाशक आदि […]

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गैहूँ की गौ आधारित –  जैविक खेती की तकनीकी जानकारी 

गैहूँ की गौ आधारित –  जैविक खेती की तकनीकी जानकारी गेहूँ की अधिकतम पैदावार के लिये बलुई दोमट, उर्वरा व जलधारण क्षमतायुक्त मिट्टी वाले सिंचित क्षैत्र उपयुक्त है। इसकी खेती अधिकाशंतः सिंचित क्षैत्रों में की जाती है लेकिन भारी चिकनी मिट्टी व पर्याप्त जलधारण क्षमता वाली भूमि में असिंचित परिस्थितियों में भी उगाया जा सकता

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सूक्ष्म जीवों की उपलब्धता का सरल समाधान ताजा गोबर

(जीवाणु खाद या जैव उर्वरक या बायो फर्टिलाइजर के रूप में ताजा गोबर) वर्तमान समय में कृषि उत्पादन को बढ़ाना सभी कृषकों एवं कृषि चिंतको के सामने प्रमुख चुनौती है। सघन कृषि से पोषक तत्त्वों का स्तर गिरने की खबरे हर रोज पढने में आ रही है। जैविक खाद से इस समस्या का समाधान हो

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सरसों – राया की उन्नत किस्में एवं उत्पादन तकनीक

सरसों – राया की उन्नत किस्में एवं उत्पादन तकनीक राया – सरसों मुख्यतः कोटा संभाग, गंगानगर, हनुमानगढ़, उदयपुर, बाँसवाड़ा एवं डूँगरपुर जिले में बोई जाने वाली प्रमुख फसल है, सरसों की जैविक खेती की कृषि विधियाँ इस प्रकार हैः- सीधी बुवाई हेतु उन्नत किस्में – पूसा सरसों – 28 (एन.पी.जे.-124), पूसा सरसों – 27 (ई.जे.

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गौ आधारित जैविक  कृषि के प्रशिक्षण के लिए 1 दिवसीय शिविर

गौ आधारित जैविक  कृषि के प्रशिक्षण के लिए आओ चले…… विश्व विख्यात पवित्र तीर्थ स्थल श्री विभीषण जी की नगरी कैथून से तीन किलोमीटर आगे ,सांगोद सड़क मार्ग पर श्रीरामशान्ताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र कोटा (राज) पर पिछले 28 माह से निरंतर चले रहे प्रत्येक माह की 15 तारीख को 1 दिवसीय प्रशिक्षण

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गौ आधारित कृषि के प्रशिक्षण के लिए सूचना एवं आमंत्रण

गौ आधारित कृषि के प्रशिक्षण के लिए आओ चले…… विश्व विख्यात पवित्र तीर्थ स्थल श्री विभीषण जी की नगरी कैथून से तीन किलोमीटर आगे ,सांगोद सड़क मार्ग पर श्रीरामशान्ताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र कोटा (राज) पर पिछले 27 माह से निरंतर चले रहे प्रत्येक माह की 15 तारीख को 1 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर

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सोयाबीन की जैविक खेती

सोयाबीन की जैविक खेती सोयाबीन एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है। राजस्थान में इसकी खेती मुख्यतः कोटा, बून्दी, बाँरा, झालावाड, चितोड़गढ़, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर एवं प्रतापगढ़ जिलों में की जाती है। सोयाबीन के लिये चिकनी भारी, अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ तथा उसर रहित मिट्टी उपयुक्त रहती है। उन्नत किस्में जे एस 335 (1994): 110 दिन की

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तकनीकी सलाह एवं सूचना

गोयाल ग्रामीण विकास संस्थान कोटा द्वारा स्थापित श्रीरामशान्ताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र के द्वारा तकनीकी सलाह एवं सूचना रबी ऋतु में सभी फसलों में बढ़वार, फसल के अच्छे स्वास्थ्य, फल एवं फूलों के अधिक उत्पादन हेतु किए जाने वाले कार्यों का विवरण  निम्नलिखित हैं – यदि पहली बार जैविक कृषि हेतु प्रयास कर

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धान की जैविक खेती

धान की जैविक खेती धान मुख्यतः कोटा संभाग, गंगानगर, हनुमानगढ़, उदयपुर, बाँसवाड़ा एवं डूँगरपुर जिले में बोई जाने वाली प्रमुख फसल है, धान की जैविक खेती की कृषि विधियाँ इस प्रकार हैः- रोपाई हेतु उन्नत किस्में – पूसा बासमती 1509 (2013), प्रताप सुगन्धा – 1 (2013), इम्प्रुव पूसा बासमती – (2007), पूसा सुगन्धा – 4

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मिट्टी जांच श्रीरामशान्ताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान कोटा के द्वारा

नमस्कार किसान भाइयो ….. श्रीरामशान्ताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान कोटा के प्रांगण पर स्थापित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला द्वारा सभी किसान भाईयों के खेत की मिट्टी जांच करवा सकते हैं । जिस किसान भाई को मिट्टी जांच करवानी वह  केन्द्र पर सैंपल जमा कर सकते हैं। मृदा परीक्षण में pH,EC, जैविक कार्बन,नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश,

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